विमानों के दरवाजे के साथ जुड़ने के लिए दर्जनों जेट ब्रिज तैयार खड़े हैं. डिज़िटल स्क्रीन पर उड़ान की सूचनाएं प्रदर्शित हो रही हैं. चमचमाते टर्मिनल को मुसाफ़िरों के आने का इंतज़ार है.
बर्लिन का ब्रांडनबर्ग विली ब्रैंड्ट एयरपोर्ट (BER) यूरोप के किसी भी दूसरे प्रमुख आधुनिक एयरपोर्ट की तरह दिखता है, बस एक बड़ी समस्या को छोड़कर.
यह एयरपोर्ट सात साल पहले खुलने वाला था, लेकिन यह आज भी सुनसान है. जर्मनी अपनी दक्षता और बेहतरीन इंजीनियरिंग के लिए जाना जाता है, लेकिन बात जब बर्लिन के नये भुतहा एयरपोर्ट की होती है, तब यह प्रतिष्ठा झूठी लगती है.
बार-बार हो रही देरी, ख़राब प्रबंधन और शुरुआती बजट से साढ़े तीन गुना से ज्यादा खर्च के कारण यह एयरपोर्ट बर्लिन के लोगों के बीच एक मज़ाक बनकर रह गया है. राजनेता, कारोबारी प्रमुख और स्थानीय निवासी, सभी इससे समान रूप से निराश हैं.
उन्होंने कहा, "इस एयरपोर्ट को जून 2012 में खुल जाना चाहिए था. उस समय ही इसकी लागत बजट को पार कर चुकी थी और समय खत्म हो रहा था. लेकिन कहानी अभी भी चल रही है."
और कितना वक़्त लगेगा?
नये एयरपोर्ट की योजना 1989 में बर्लिन की दीवार गिरने के बाद बनाई गई थी.
यह साफ़ हो गया था कि जर्मनी की नई एकीकृत राजधानी को शीतयुद्ध के समय के दो हवाई अड्डों- टेगेल (पश्चिमी बर्लिन) और शोनफेल्ड (पूर्वी बर्लिन) की क्षमता से बड़े और आधुनिक एयरपोर्ट की जरूरत होगी.
नये एयरपोर्ट पर 2006 में काम शुरू हुआ. तब यह समझा जा रहा था कि नया एयरपोर्ट बन जाने के बाद टेगेल और शोनफ़ेल्ड, दोनों को बंद कर दिया जाएगा.
2010 की गर्मियों में गड़बड़ी का पहला बड़ा संकेत मिला जब राज्य और संघ नियंत्रित कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन- फ़्लूगाफेन बर्लिन-ब्रांडनबर्ग ने एयरपोर्ट चालू करने की तारीख़ अक्टूबर 2011 से जून 2012 तक बढ़ा दी गई.
2012 में लग रहा था कि एयरपोर्ट खोल दिया जाएगा. कार्यक्रम की योजना बना ली गई थी, जिसमें चांसलर एंगेला मर्केल को भी आना था. लेकिन जब एक महीने से भी कम समय रह गया, तब निरीक्षकों ने पाया कि अग्निशमन प्रणाली में खामियां हैं. इससे एयरपोर्ट खोलने का कार्यक्रम 2013 तक टाल दिया गया. पहले धुआं निकलने की प्रणाली में खामी पाई गई. फिर दूसरी बड़ी समस्याएं सामने आने लगीं.
प्रोजेक्ट एक, खामियां अनेक
90 मीटर से ज्यादा लंबे केबल को गलत लगा दिया गया था. 4000 दरवाजों पर गलत नंबर डाल दिए गए थे. एस्केलेटर हुत छोटे थे. चेक-इन डेस्क की इतनी कमी थी कि योजनाकारों ने प्रस्ताव रखा कि कुछ एयरलाइन कंपनियां टर्मिनल के सामने टेंट लगाकर यात्रियों की जांच कर लें. एयरलाइन कंपनियों ने इसका विरोध किया.
जर्मनी की संसदीय हवाई-अड्डा समिति में सोशल डेमोक्रेट्स के प्रवक्ता जोर्ग स्ट्रोएटर ने बीबीसी कैपिटल को बताया कि इस तरह की गलतियों ने और उनको नये सिरे से बनाने की जगह उनको ठीक करने के फ़ैसले ने लागत को आसमान तक पहुंचा दिया.
बर्लिन का ब्रांडनबर्ग विली ब्रैंड्ट एयरपोर्ट (BER) यूरोप के किसी भी दूसरे प्रमुख आधुनिक एयरपोर्ट की तरह दिखता है, बस एक बड़ी समस्या को छोड़कर.
यह एयरपोर्ट सात साल पहले खुलने वाला था, लेकिन यह आज भी सुनसान है. जर्मनी अपनी दक्षता और बेहतरीन इंजीनियरिंग के लिए जाना जाता है, लेकिन बात जब बर्लिन के नये भुतहा एयरपोर्ट की होती है, तब यह प्रतिष्ठा झूठी लगती है.
बार-बार हो रही देरी, ख़राब प्रबंधन और शुरुआती बजट से साढ़े तीन गुना से ज्यादा खर्च के कारण यह एयरपोर्ट बर्लिन के लोगों के बीच एक मज़ाक बनकर रह गया है. राजनेता, कारोबारी प्रमुख और स्थानीय निवासी, सभी इससे समान रूप से निराश हैं.
उन्होंने कहा, "इस एयरपोर्ट को जून 2012 में खुल जाना चाहिए था. उस समय ही इसकी लागत बजट को पार कर चुकी थी और समय खत्म हो रहा था. लेकिन कहानी अभी भी चल रही है."
और कितना वक़्त लगेगा?
नये एयरपोर्ट की योजना 1989 में बर्लिन की दीवार गिरने के बाद बनाई गई थी.
यह साफ़ हो गया था कि जर्मनी की नई एकीकृत राजधानी को शीतयुद्ध के समय के दो हवाई अड्डों- टेगेल (पश्चिमी बर्लिन) और शोनफेल्ड (पूर्वी बर्लिन) की क्षमता से बड़े और आधुनिक एयरपोर्ट की जरूरत होगी.
नये एयरपोर्ट पर 2006 में काम शुरू हुआ. तब यह समझा जा रहा था कि नया एयरपोर्ट बन जाने के बाद टेगेल और शोनफ़ेल्ड, दोनों को बंद कर दिया जाएगा.
2010 की गर्मियों में गड़बड़ी का पहला बड़ा संकेत मिला जब राज्य और संघ नियंत्रित कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन- फ़्लूगाफेन बर्लिन-ब्रांडनबर्ग ने एयरपोर्ट चालू करने की तारीख़ अक्टूबर 2011 से जून 2012 तक बढ़ा दी गई.
2012 में लग रहा था कि एयरपोर्ट खोल दिया जाएगा. कार्यक्रम की योजना बना ली गई थी, जिसमें चांसलर एंगेला मर्केल को भी आना था. लेकिन जब एक महीने से भी कम समय रह गया, तब निरीक्षकों ने पाया कि अग्निशमन प्रणाली में खामियां हैं. इससे एयरपोर्ट खोलने का कार्यक्रम 2013 तक टाल दिया गया. पहले धुआं निकलने की प्रणाली में खामी पाई गई. फिर दूसरी बड़ी समस्याएं सामने आने लगीं.
प्रोजेक्ट एक, खामियां अनेक
90 मीटर से ज्यादा लंबे केबल को गलत लगा दिया गया था. 4000 दरवाजों पर गलत नंबर डाल दिए गए थे. एस्केलेटर हुत छोटे थे. चेक-इन डेस्क की इतनी कमी थी कि योजनाकारों ने प्रस्ताव रखा कि कुछ एयरलाइन कंपनियां टर्मिनल के सामने टेंट लगाकर यात्रियों की जांच कर लें. एयरलाइन कंपनियों ने इसका विरोध किया.
जर्मनी की संसदीय हवाई-अड्डा समिति में सोशल डेमोक्रेट्स के प्रवक्ता जोर्ग स्ट्रोएटर ने बीबीसी कैपिटल को बताया कि इस तरह की गलतियों ने और उनको नये सिरे से बनाने की जगह उनको ठीक करने के फ़ैसले ने लागत को आसमान तक पहुंचा दिया.
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